Posted by: kanchan | April 8, 2008

तुम्हारी याद आते ही

तुमको देखते ही
बजी दिल की घंटी

तुम्हारी याद आते ही
हुई मन में हलचल
पता नहीं क्यों
कब और कैसे
हुआ है तुम्हारी
किस बात का
इतना गहरा असर
न जान पाया
और ना ही कुछ
सोच और समझ पाय
पर यह सच है
कि छुआ है तुमने
मेरे दिल को
पता नहीं वो
कौन-सा अहसास है
कौन-सी बात है
जो छू गई है
मेरी दिल की गहराई को
और कर रही है बेचैन
कुछ तो हुआ है
जो कह पाना मुश्किल
ही नहीं नामुमकिन भी है

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